“ट्रेवल डायरी” मार्च 2017

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International Yoga Festival

इंटरनेशनल योग फेस्टिवल
योग और फिटनेस में दिलचस्पी रखने वाला हर व्यक्ति इसमें शामिल होना चाहेगा। करीब तीस देशों के चार सौ लोग यहां होंगे। फेस्टिवल में वर्ल्ड क्लास योग टीचर्स से योगा क्लासेज लीजिए, शाम को आध्यात्मिक गुरुओं से प्रवचन सुनिए। वेजिटेरियन कुकिंग क्लासेज आदि अनेक कार्यक्रमों में हिस्सा लीजिए।
कब: एक से सात मार्च तक
कहां: परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश, उत्तराखंड


चपचर कुट

Chap Char Kut Festival Mizoram
ChapChar Kut Festival Mizoram

यह फसल का त्यौहार है। बांस की फसल काटने का उत्सव स्थानीय लोगों द्वारा मनाया जाता है। पारंपरिक बंबू डांस यहां का आकर्षण है, जिसमें पुरुष जमीन पर बैठकर एक-दूसरे से बांस की डंडिया टकराकर डांस करते हैं। कुछ आदिवासियों द्वारा डांस में बांस से पारंपरिक ड्रम बजाया जाता है। इस उस्तव में आप हस्तशिल्प और फ्लावर शो भी देख सकते हैं।
कब: 3 मार्च
कहां: आइजोल, मिजोरम


अट्टुकल पोंगल

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पूरा त्रिवेंद्रम धुंए की चादर से ढक जाता है, जब अट्टुकल पोंगल के अवसर पर दुनिया भर से आई स्त्रियां मान्यता के अनुसार देवी अट्टूकलामा के लिए भोजन पकाती हैं। यह त्यौहार गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में 1997 में दर्ज हुआ, जब 15 लाख महिलाओं ने इसमें भागीदारी की।
कब: 11 मार्च
कहां: अट्ठकल भगवती टेंपल, त्रिवेंद्रम, केरल

मेवाड़ी होलिका दहन

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अलग तरह के मेवाड़ी राजसी होलिका दहन के आनंद के लिए राजस्थान जाना होगा। यूं तो होली पर बुरी शक्तियों को जलाने के लिए होलिका दहन करते हैं, लेकिन न भूलने वाला अनुभव आपको मेवाड़ के राजसी परिवार के साथ हासिल होगा। यहां मानेक चौक के राजमहल में होलिका दहन में राजसी ठाठ-बाट का आनंद ले सकते हैं।
कब: 12 मार्च
कहां: सिटी पैलेस, उदयपुर राजस्थान

होली

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Holi

रंगों का त्यौहार के रूप में प्रसिद्ध भारत का प्रमुख त्यौहार है होली, जिसकी छटा उत्तर भारत के हर स्थान पर दिखाई देती है। लोग एक-दूसरे पर रंगों की वर्षा करते हैं और एक दूसरे के साथ पकवान बांटते हैं। खासतौर पर मथुरा-बरसाना जैसे कुछ धार्मिक व सांस्कृतिक स्थानों पर होली की छटा निराली होती है। आनंद के इस त्यौहार को मना कर ही जान सकते हैं।
कब: 13 मार्च
कहां: पुरे भारत में, खासतौर पर उत्तर भारत में। 


मियोको उत्सव
अगर आपकी आदिवासी पारंपरिक त्यौहार के बारे में उत्सुकता है तो एक महीने तक चलने वाले इस त्यौहार में शामिल हो सकते हैं। यह समृद्धि, उत्पादकता,शुद्धता और बलिदान के लिए जाना जाता है, जिसके लिए यहां के आदिवासी अपना पारंपरिक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।
कब: 20 मार्च के आसपास शुरू
(जाने से पहले सुनिश्चित करें)
कहां: जीरो, अरुणाचल प्रदेश 


शिगमो

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Shigmo in goa

गोवा का सबसे बड़ा वासंतिक उस्तव है। इसे गोवा की होली भी कह सकते हैं। खूब सजावट होती है, शोभा यात्रा निकलती है, गीत-संगीत और पारंपरिक नृत्य आदि का समां आपको खिंच लेता है। घोड़े मोदनी पारंपरिक हॉर्स डांस आकर्षण है।
कब: 24 मार्च-7 अप्रैल
कहां: गोवा में

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